खामोश पन्ने – Chapter 5 | अधूरी आवाज़ | Original Hindi Mystery & Emotional Novel
क्या हर सच पर भरोसा किया जा सकता है...?
अन्वी अब उस इंसान से मिल चुकी है जो खुद को उसके परिवार का आख़िरी गवाह बताता है।
लेकिन उसी समय डायरी और रिकॉर्डिंग उसे चेतावनी देती हैं...
"जिस इंसान पर तुम भरोसा कर रही हो... उसकी हर बात पर यक़ीन मत करना।"
आख़िर सच कौन बोल रहा है?
पढ़िए...
📖 खामोश पन्ने – Chapter 5 : अधूरी आवाज़ ❤️
"कुछ आवाज़ें कभी ख़ामोश नहीं होतीं... वे बस सही इंसान का इंतज़ार करती हैं।"
तहखाने में सन्नाटा पसरा हुआ था।
अन्वी की साँसें तेज़ चल रही थीं।
उसकी टॉर्च की रोशनी अँधेरे को चीरने की कोशिश कर रही थी...
लेकिन सामने...
उसे सिर्फ़ दो चमकती हुई आँखें दिखाई दे रही थीं।
उसका गला सूख गया।
"क... कौन है वहाँ?"
कोई जवाब नहीं आया।
धीरे-धीरे वह आकृति रोशनी में आई।
एक दुबला-पतला...
सफेद बालों वाला बूढ़ा आदमी।
उसकी आँखों में डर नहीं...
दर्द था।
वह कुछ कदम आगे बढ़ा।
अन्वी पीछे हट गई।
"डरिए मत..."
बूढ़े आदमी की आवाज़ धीमी थी।
"मैं तुम्हारा दुश्मन नहीं हूँ।"
अन्वी ने काँपती आवाज़ में पूछा—
"आप... कौन हैं?"
बूढ़े ने उसकी तरफ़ देखा।
"मैं..."
"इस घर का आख़िरी गवाह हूँ।"
अन्वी कुछ समझ नहीं पाई।
"गवाह... किस बात का?"
बूढ़ा हल्का-सा मुस्कुराया।
"उस रात का..."
"जिसने तुम्हारे पूरे परिवार की ज़िंदगी बदल दी।"
अन्वी की धड़कन फिर तेज़ हो गई।
"क्या आप उस आदमी को जानते हैं...
जिसका चेहरा तस्वीर में मिटा दिया गया था?"
बूढ़े की आँखें भर आईं।
"जानता हूँ..."
"क्योंकि..."
"मैंने ही उसकी आख़िरी साँस देखी थी।"
अन्वी के पैरों तले ज़मीन खिसक गई।
उसी समय...
पुराना टेप रिकॉर्डर फिर अपने-आप चल पड़ा।
इस बार आवाज़ पहले से साफ़ थी।
"अगर यह रिकॉर्डिंग फिर चल रही है..."
"...तो इसका मतलब है कि अन्वी अकेली नहीं है।"
बूढ़े आदमी का चेहरा अचानक बदल गया।
वह घबराकर रिकॉर्डर की तरफ़ देखने लगा।
जैसे उसे इस आवाज़ का इंतज़ार नहीं था।
रिकॉर्डिंग आगे बढ़ी—
"जिस इंसान पर तुम भरोसा कर रही हो..."
"...उसकी हर बात पर यक़ीन मत करना।"
अन्वी ने तुरंत बूढ़े की तरफ़ देखा।
कमरे में कुछ पल के लिए गहरा सन्नाटा छा गया।
बूढ़े ने धीमे से कहा—
"रिकॉर्डिंग हमेशा पूरी सच्चाई नहीं बताती।"
लेकिन...
उसकी काँपती आवाज़ बता रही थी...
कि वह कुछ छिपा रहा है।
अन्वी ने मेज़ पर रखी पुरानी डायरी उठाई।
इस बार...
पाँचवाँ पन्ना अपने-आप खुल गया।
उस पर लिखा था—
"सच तक पहुँचने के लिए...
तुम्हें एक रिश्ता खोना पड़ेगा।"
उसकी आँखें नम हो गईं।
"कौन-सा रिश्ता...?"
कोई जवाब नहीं था।
सिर्फ़ एक सूखा हुआ गुलाब...
उस पन्ने के बीच दबा हुआ था।
गुलाब के नीचे...
एक छोटी-सी चिट्ठी रखी थी।
उस पर लिखा था—
"मीरा को सच कभी मत बताना..."
अन्वी का दिल ज़ोर से धड़का।
"मीरा...?"
उसके परिवार में...
इस नाम का कोई नहीं था।
अचानक...
ऊपर से किसी के दौड़ने की आवाज़ आई।
धड़... धड़... धड़...
बूढ़ा आदमी घबरा गया।
"वह आ गया..."
"अब तुम्हें यहाँ से जाना होगा।"
"कौन?"
अन्वी ने पूछा।
लेकिन बूढ़े ने कोई जवाब नहीं दिया।
उसने जल्दी से दीवार के कोने में बनी एक छोटी लकड़ी की अलमारी खोली।
अंदर...
एक पुराना लॉकेट रखा था।
लॉकेट के भीतर...
एक बच्ची की तस्वीर थी।
पीछे लिखा था—
"मीरा – 1998"
अन्वी की उँगलियाँ काँप उठीं।
"क्या यही... मीरा है?"
बूढ़े ने पहली बार उसकी आँखों में देखकर कहा—
"अगर मीरा का सच खुल गया..."
"तो तुम्हारे परिवार का हर रिश्ता बदल जाएगा।"
तभी...
पूरे तहखाने की लाइट एक साथ जल उठी।
अन्वी चौंक गई।
उसने पीछे मुड़कर देखा।
सीढ़ियों के ऊपर...
एक आदमी खड़ा था।
चेहरा अँधेरे में छिपा हुआ।
हाथ में...
वही पुरानी डायरी।
उसने धीमी लेकिन सख्त आवाज़ में कहा—
"डायरी मुझे दे दो..."
"वरना... अगला नाम तुम्हारा होगा।"
अन्वी का दिल ज़ोर से धड़कने लगा।
उसने डायरी को अपनी छाती से लगा लिया।
और पहली बार...
उसे एहसास हुआ...
कि यह लड़ाई अब सिर्फ़ एक परिवार के राज़ की नहीं रही...
बल्कि उसकी अपनी ज़िंदगी की भी बन चुकी थी।
Chapter 5 Ends... ❤️
To Be Continued... 📖
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– DilSe Diaries by Pooja.K
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