📖 KHAMOSH PANNE
Chapter 1 – पहली धड़कन
"कुछ कहानियाँ शुरू नहीं होतीं...
वो धीरे-धीरे किसी की ज़िंदगी में उतरती हैं।"
उस दिन बारिश हो रही थी...
वैसी नहीं...
जो सिर्फ़ सड़कें भिगो दे।
वैसी...
जो इंसान के अंदर दबे हुए सालों पुराने एहसासों को भी जगा दे।
शहर की भीड़ हमेशा की तरह भाग रही थी।
किसी को ऑफिस पहुँचना था...
किसी को घर...
और किसी को बस अपने दर्द से थोड़ा दूर जाना था।
लेकिन...
उस पुरानी गली के आख़िरी मकान में...
समय जैसे कई सालों से रुका हुआ था।
वहाँ रहती थी...
अन्वी।
साधारण सी लड़की।
मध्यमवर्गीय परिवार।
चेहरे पर हमेशा मुस्कान...
और आँखों में हमेशा अधूरी नींद।
लोग कहते थे...
"अन्वी बहुत हँसती है।"
पर कोई ये नहीं जानता था...
कि सबसे ज़्यादा मुस्कुराने वाले लोग ही अक्सर सबसे ज़्यादा टूटे होते हैं।
उस सुबह उसने घर की सफ़ाई करते हुए पुरानी लकड़ी की अलमारी खोली।
अलमारी से हल्की-सी मिट्टी की खुशबू आई।
जैसे बरसों से बंद कोई याद धीरे से साँस ले रही हो।
ऊपर रखे पुराने कपड़ों के नीचे...
भूरे रंग के कपड़े में लिपटी एक डायरी रखी थी।
डायरी पर धूल की मोटी परत जमी थी।
उसने उँगलियों से धूल हटाई।
धीरे-धीरे...
कुछ अक्षर साफ़ दिखाई देने लगे।
"खामोश पन्ने"
उसका दिल एक पल को रुक-सा गया।
"ये डायरी यहाँ कैसे आई...?"
उसे याद नहीं था कि उसने इसे कभी देखा हो।
घर में दादी के गुज़र जाने के बाद इस अलमारी को किसी ने हाथ तक नहीं लगाया था।
अन्वी ने डायरी उठाई।
पहला पन्ना खोला।
अंदर सिर्फ़ एक पंक्ति लिखी थी—
"अगर तुम ये पढ़ रहे हो... तो इसका मतलब है कि मैं अपना सच तुम्हें ख़ुद कभी नहीं बता पाया।"
उसके हाथ काँप गए।
ये लिखावट...
उसे कहीं देखी हुई लगी।
बहुत पास की...
बहुत अपनी...
लेकिन याद नहीं आ रहा था कहाँ।
उसने दूसरा पन्ना पलटना चाहा...
तभी...
पूरे घर की बिजली चली गई।
कमरे में अचानक अँधेरा छा गया।
खिड़की से आती बारिश की आवाज़ और तेज़ हो गई।
उसी सन्नाटे में...
उसे लगा...
जैसे उसके पीछे कोई बहुत धीमी आवाज़ में बोला हो—
"दूसरा पन्ना मत खोलना..."
अन्वी एकदम पलटी।
कमरे में...
कोई नहीं था।
बस खुली खिड़की...
बरसती बारिश...
और उसके हाथों में...
वो पुरानी डायरी।
उसने फिर डायरी की तरफ़ देखा...
और पाया...
कि अभी-अभी जिस पहले पन्ने पर सिर्फ़ एक पंक्ति लिखी थी...
उस पर अब एक और पंक्ति उभर आई थी।
"अब वापस लौटना आसान नहीं होगा..."
Chapter 1 Ends...
To be continued...
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