खामोश पन्ने – Chapter 3 | तीसरी दस्तक | Original Hindi Mystery & Emotional Novel
📖 KHAMOSH PANNE Chapter 3 – तीसरी दस्तक ❤️ "कुछ तस्वीरें सिर्फ़ चेहरे नहीं छिपातीं... वे पूरी ज़िंदगी का सच छिपा लेती हैं।" रात गहरी हो चुकी थी। बारिश अब भी रुकने का नाम नहीं ले रही थी। अन्वी अपने कमरे में बैठी थी। उसकी नज़र बार-बार उस पुरानी तस्वीर पर जा रही थी, जिसे उसने अपनी किताब के बीच छिपा दिया था। तस्वीर में दादी थीं... एक छोटा बच्चा... एक मुस्कुराती हुई औरत... और वह आदमी... जिसके चेहरे पर काली स्याही फेर दी गई थी। आख़िर वह था कौन? और किसी ने उसकी पहचान क्यों मिटा दी? नीचे से माँ ने फिर आवाज़ लगाई— "अन्वी... खाना ठंडा हो रहा है।" अन्वी ने तस्वीर जल्दी से किताब में रखी और नीचे चली गई। डाइनिंग टेबल पर अजीब-सी ख़ामोशी थी। पापा अख़बार पढ़ने का नाटक कर रहे थे। माँ बार-बार अन्वी की तरफ़ देख रही थीं। जैसे उन्हें महसूस हो गया हो कि कुछ बदल गया है। "सब ठीक है ना, बेटा?" माँ ने पूछा। अन्वी मुस्कुरा दी। "हाँ माँ... बस थोड़ा सिर दर्द है।" उसने झूठ कहा। खाना खाते-खाते उसकी नज़र दीवार पर टंगी दादी की तस्वीर पर गई। आज पहली बार... उसे लगा जैस...