खामोश पन्ने Chapter 21 – वो आदमी कौन था? | Original Hindi Mystery Novel
📖 KHAMOSH PANNE
Chapter 21 – वो आदमी कौन था? ❤️
"कुछ चेहरे पहली बार सामने आते हैं... लेकिन दिल उन्हें पहचानने में देर नहीं करता।"
कमरे में...
लाइट वापस आ चुकी थी।
लेकिन अन्वी को ऐसा लग रहा था...
जैसे उसके आसपास की पूरी दुनिया अँधेरे में डूब गई हो।
उसकी नज़र...
सिर्फ़ उस आदमी पर थी।
वही आदमी...
जो कुछ सेकंड पहले...
आर्यन के पीछे खड़ा था।
और जिसने...
बिना किसी झिझक के कहा था—
"हैलो, बेटी।"
अन्वी की साँसें तेज़ हो गईं।
उसने धीरे से पूछा—
"आप..."
"कौन हैं?"
आदमी ने कोई जवाब नहीं दिया।
वह बस...
उसे देखता रहा।
ऐसे...
जैसे वर्षों बाद अपनी खोई हुई चीज़ को देख रहा हो।
आर्यन अचानक उसके सामने आ खड़े हुए।
"अन्वी..."
"इसके पास मत जाना।"
अन्वी ने आर्यन की तरफ़ देखा।
"पापा..."
उसकी आवाज़ काँप रही थी।
"आप इसे जानते हैं?"
आर्यन ने आँखें बंद कर लीं।
कुछ पल तक...
उन्होंने कुछ नहीं कहा।
फिर...
बहुत धीमी आवाज़ में बोले—
"हाँ।"
अन्वी का दिल बैठ गया।
"कौन है ये?"
आर्यन ने उसकी तरफ़ देखा।
और पहली बार...
उनके चेहरे पर वह डर था...
जो किसी दुश्मन को देखकर नहीं आता।
वह डर...
किसी अपने को खोने का था।
"ये..."
आर्यन की आवाज़ टूट गई।
"तुम्हारे जन्म से पहले..."
"मेरी ज़िंदगी का सबसे बड़ा राज़ था।"
अन्वी ने उस आदमी की तरफ़ देखा।
"नाम?"
आदमी ने खुद जवाब दिया।
"अर्जुन।"
आर्या अचानक पीछे हट गई।
"अर्जुन...?"
डॉ. राघव ने भी चौंककर उसकी तरफ़ देखा।
"ये नाम..."
"Project Zero की किसी फ़ाइल में नहीं था।"
अर्जुन हल्का-सा मुस्कुराया।
"क्योंकि..."
"मैं फ़ाइल में था ही नहीं।"
"मैं..."
"उस फ़ाइल को लिखने वाला था।"
अन्वी के माथे पर बल पड़ गए।
"क्या मतलब?"
अर्जुन ने धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए कहा—
"Project Zero..."
"Project A-13..."
"Memory Grid..."
"ये सब अलग-अलग प्रोजेक्ट नहीं थे।"
"ये..."
"एक ही कहानी के अलग-अलग अध्याय थे।"
अन्वी ने पूछा—
"और आप?"
अर्जुन ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा—
"मैं उस कहानी का पहला पन्ना था।"
कमरे में सन्नाटा छा गया।
तभी...
आर्यन ने कहा—
"तुम्हें यहाँ नहीं आना चाहिए था।"
अर्जुन ने उसकी तरफ़ देखा।
"और तुम्हें..."
"इतने साल तक झूठ नहीं बोलना चाहिए था।"
अन्वी ने तुरंत पूछा—
"झूठ?"
आर्यन चुप।
अर्जुन ने कहा—
"तुम्हारे पिता ने तुमसे एक सच छुपाया।"
अन्वी ने आर्यन की तरफ़ देखा।
"कौन-सा?"
अर्जुन ने उत्तर दिया—
"तुम सिर्फ़ Project A-13 की Subject नहीं थीं..."
"तुम उसका अंतिम उद्देश्य थीं।"
अन्वी के हाथ ठंडे पड़ गए।
"अंतिम उद्देश्य?"
डॉ. राघव ने बीच में कहा—
"अर्जुन..."
"बस।"
लेकिन अर्जुन रुका नहीं।
"तुम्हें पैदा किया गया..."
"किसी मशीन को चलाने के लिए नहीं।"
"तुम्हें पैदा किया गया था..."
"एक ऐसी क्षमता के साथ..."
"जो किसी और इंसान में नहीं थी।"
अन्वी ने पूछा—
"कौन-सी क्षमता?"
अर्जुन ने जवाब देने के बजाय...
अपनी जेब से एक पुराना लॉकेट निकाला।
अन्वी का चेहरा बदल गया।
वह लॉकेट...
बिल्कुल वैसा ही था...
जैसा उसके पास था।
अर्जुन ने कहा—
"इसे पहचानती हो?"
अन्वी ने अपना लॉकेट निकाला।
दोनों लॉकेट...
एक-दूसरे के पास आते ही...
हल्की गर्म रोशनी से चमक उठे।
आर्या ने फुसफुसाकर कहा—
"ये संभव नहीं है..."
अर्जुन ने उसकी तरफ़ देखा।
"क्योंकि तुम्हें बताया गया था..."
"कि ये दोनों लॉकेट कभी एक साथ नहीं आ सकते।"
अन्वी ने पूछा—
"किसने बताया था?"
अर्जुन ने आर्यन की तरफ़ देखा।
आर्यन की आँखें झुक गईं।
अन्वी की आवाज़ भर्रा गई।
"पापा..."
"अब कोई बात मत छुपाइए।"
आर्यन ने गहरी साँस ली।
फिर...
धीरे से कहा—
"अर्जुन तुम्हारा पिता नहीं है।"
अन्वी की आँखें अर्जुन पर टिक गईं।
"तो फिर..."
"ये मुझे बेटी क्यों कह रहा है?"
आर्यन ने उत्तर दिया—
"क्योंकि..."
"वह तुम्हें उस नाम से नहीं बुला रहा।"
अन्वी चौंकी।
"क्या मतलब?"
आर्यन ने अर्जुन की तरफ़ देखा।
"तुम्हारा नाम..."
"जब तुम पैदा हुई थीं..."
"अन्वी नहीं था।"
कमरे में...
जैसे समय रुक गया।
"तो मेरा नाम क्या था?"
आर्यन की आँखों में आँसू आ गए।
उन्होंने बहुत धीमे कहा—
"आहना।"
अन्वी...
कुछ बोल नहीं पाई।
अर्जुन ने आँखें बंद कर लीं।
"आहना..."
"तुम्हारी माँ तुम्हें इसी नाम से बुलाती थी।"
"मीरा..."
अन्वी ने फुसफुसाया।
अर्जुन ने सिर हिलाया।
"हाँ।"
फिर उसने...
एक पुरानी तस्वीर निकाली।
तस्वीर में...
मीरा एक नवजात बच्ची को गोद में लिए थी।
उसके पास...
आर्यन खड़े थे।
और तस्वीर के पीछे...
एक आदमी का आधा चेहरा दिखाई दे रहा था।
अन्वी ने तस्वीर को पलटा।
पीछे लिखा था—
"मेरी आहना के लिए..."
और नीचे...
मीरा के हस्ताक्षर।
अन्वी की आँखों से आँसू बह निकले।
"तो आपने मुझे क्यों छोड़ा?"
अर्जुन की आँखें भर आईं।
"मैंने तुम्हें छोड़ा नहीं था।"
"मुझे..."
"तुमसे दूर किया गया था।"
"किसने?"
अर्जुन ने कमरे की स्क्रीन की तरफ़ देखा।
वहाँ अचानक...
एक पुराना चिन्ह उभरा।
वही...
गोल घेरा।
और उसके बीच...
एक आँख।
द ऑर्डर।
अर्जुन ने कहा—
"The Order ने तुम्हें नहीं चुना था..."
"उन्होंने मुझे चुना था।"
अन्वी ने पूछा—
"क्यों?"
"क्योंकि..."
अर्जुन ने उसकी तरफ़ देखते हुए कहा—
"मैं तुम्हारी माँ को बचाना चाहता था।"
अन्वी का दिल काँप गया।
"माँ..."
अर्जुन ने धीरे से कहा—
"मीरा ने Project Zero को रोकने की कोशिश की थी।"
"लेकिन उसे पता चल चुका था..."
"कि Project Zero का सबसे बड़ा रहस्य..."
"तुम थीं।"
अन्वी ने पूछा—
"मैं?"
अर्जुन ने सिर हिलाया।
"तुम्हारे अंदर..."
"दूसरों की यादों को सिर्फ़ पहचानने की नहीं..."
"उन्हें जोड़ने की क्षमता थी।"
"तुम..."
"टूटी हुई यादों को पूरा कर सकती थीं।"
अन्वी ने धीरे से कहा—
"और A-14?"
अर्जुन ने आर्या की तरफ़ देखा।
फिर बोला—
"A-14 तुम्हारी बहन नहीं थी।"
आर्या की आँखों में आँसू आ गए।
"वह..."
"तुम्हारी पहली याद थी।"
अन्वी ने कुछ समझा नहीं।
अर्जुन ने कहा—
"मीरा ने तुम्हारी कुछ यादें..."
"A-14 में सुरक्षित कर दी थीं।"
"इसलिए..."
"जब A-14 जागी..."
"तुम्हारे भीतर भी पुरानी यादें जागने लगीं।"
अन्वी ने आर्या की तरफ़ देखा।
आर्या मुस्कुरा रही थी।
उसकी आँखों में आँसू थे।
"अब समझी..."
"मैं तुम्हारी दुश्मन नहीं थी।"
"मैं तुम्हारा वो हिस्सा थी..."
"जिसे तुम भूल चुकी थीं।"
अन्वी आगे बढ़ी।
और पहली बार...
उसने आर्या को गले लगा लिया।
कुछ पल...
दोनों बहनें नहीं...
दो बिखरी हुई यादें...
एक-दूसरे में समा रही थीं।
लेकिन...
सुकून का वह पल...
ज़्यादा देर नहीं रहा।
अचानक...
सभी स्क्रीनें फिर से जल उठीं।
एक संदेश दिखाई दिया—
MEMORY MERGE INITIATED
डॉ. राघव घबरा गए।
"नहीं!"
"अभी नहीं!"
अर्जुन ने तुरंत कहा—
"उन्होंने हमें ढूँढ लिया।"
आर्यन ने पूछा—
"कौन?"
अर्जुन ने स्क्रीन की तरफ़ देखा।
उसकी आवाज़ में पहली बार डर था।
"The Order नहीं..."
"समर भी नहीं..."
"तो फिर?"
स्क्रीन पर एक नया नाम दिखाई दिया—
PROJECT ZERO — CREATOR
नीचे...
एक तस्वीर उभरी।
अन्वी ने तस्वीर देखते ही...
अपना हाथ मुँह पर रख लिया।
क्योंकि तस्वीर में...
वही आदमी था...
जो कुछ सेकंड पहले...
उसके सामने खड़ा था।
अर्जुन।
अन्वी ने उसकी तरफ़ देखा।
"आप...?"
अर्जुन ने कुछ नहीं कहा।
फिर...
स्क्रीन पर एक और लाइन दिखाई दी—
CREATOR STATUS: ACTIVE
अन्वी की आँखों में सवाल था।
"आपने कहा था..."
"आप मेरी रक्षा कर रहे थे।"
अर्जुन ने धीरे से उसकी तरफ़ देखा।
और बोला—
"मैंने तुम्हें बचाया था..."
"लेकिन Project Zero मैंने ही बनाया था।"
अन्वी के चेहरे से सारी भावनाएँ जैसे गायब हो गईं।
और उसी पल...
उसे समझ आया—
जिस आदमी से वह अपने अतीत का सच पूछ रही थी...
शायद वही उसके अतीत का सबसे बड़ा कारण था।
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