खामोश पन्ने Chapter 19 – A-14 जाग चुका है | Original Hindi Mystery Novel
📖 KHAMOSH PANNE
Chapter 19 – A-14 जाग चुका है ❤️
"कुछ रहस्य दरवाज़ा खुलने पर सामने नहीं आते... वे तब सामने आते हैं, जब कोई भीतर से जागता है।"
प्रयोगशाला की सारी स्क्रीन...
एक साथ बुझ गईं।
कुछ सेकंड तक...
इतना गहरा सन्नाटा था कि अन्वी को अपनी ही धड़कन सुनाई दे रही थी।
धक...
धक...
धक...
फिर...
अँधेरे में एक छोटी-सी लाल बत्ती जली।
और उसके नीचे सिर्फ़ दो शब्द दिखाई दिए—
A-14 ACTIVE
आर्या ने अन्वी का हाथ कसकर पकड़ लिया।
उसकी उँगलियाँ बर्फ़ जैसी ठंडी थीं।
"अन्वी..."
"हमें यहाँ से जाना होगा।"
अन्वी ने उसकी तरफ़ देखा।
"लेकिन A-14 कौन है?"
आर्या ने जवाब नहीं दिया।
उसकी आँखें...
प्रयोगशाला के सबसे पुराने दरवाज़े पर टिक गईं।
डॉ. राघव अचानक आगे बढ़े।
"कोई उस दरवाज़े को मत खोलना।"
विक्रम ने पूछा—
"क्यों?"
राघव की आवाज़ काँप रही थी।
"क्योंकि..."
"वह दरवाज़ा कभी किसी इंसान के लिए बनाया ही नहीं गया था।"
अन्वी के चेहरे पर उलझन थी।
"तो फिर किसके लिए?"
राघव ने धीरे से कहा—
"A-14 के लिए।"
तभी...
दरवाज़े के पीछे से एक आवाज़ आई।
बहुत धीमी।
बहुत मासूम।
जैसे कोई बच्चा वर्षों बाद बोलना सीख रहा हो—
"माँ..."
अन्वी का शरीर सुन्न पड़ गया।
आर्या ने उसका हाथ छोड़ दिया।
और फुसफुसाई—
"नहीं..."
अन्वी ने उसकी तरफ़ देखा।
"क्या हुआ?"
आर्या की आँखों में आँसू आ गए।
"मैंने..."
"ये आवाज़ पहले भी सुनी है।"
"कहाँ?"
आर्या ने अपना सिर पकड़ लिया।
"याद नहीं..."
"लेकिन..."
"मुझे याद है कि मैं अकेली नहीं थी।"
अचानक...
दीवार पर लगी एक पुरानी स्क्रीन अपने-आप चालू हो गई।
उस पर एक तारीख दिखाई दी।
26 जून 1994
अन्वी की साँस अटक गई।
यह...
उसकी जन्मतिथि थी।
फिर स्क्रीन पर एक रिकॉर्ड खुला।
SUBJECT A-13
Birth Date: 26 June 1994
Status: Escaped
अन्वी ने स्क्रीन को घूरते हुए कहा—
"Escaped...?"
"मैं यहाँ से भागी थी?"
डॉ. राघव ने आँखें झुका लीं।
"तुम्हें..."
"यहाँ से ले जाया गया था।"
"किसने?"
राघव चुप रहे।
अन्वी ने पहली बार ऊँची आवाज़ में पूछा—
"किसने?!"
आर्यन ने धीरे से कहा—
"मीरा ने।"
अन्वी पीछे हट गई।
"माँ...?"
"हाँ।"
आर्यन की आवाज़ टूट रही थी।
"तुम्हारी माँ ने तुम्हें चुराया नहीं था..."
"उसने तुम्हें बचाया था।"
"लेकिन..."
"मुझे यहाँ क्यों लाया गया था?"
राघव ने स्क्रीन की तरफ़ देखा।
"क्योंकि A-13..."
"Memory Grid की पहली सफल मानव कुंजी थी।"
अन्वी कुछ समझ नहीं पाई।
"कुंजी?"
राघव ने सिर हिलाया।
"तुम्हारे दिमाग़ में..."
"यादों को सिर्फ़ सुरक्षित रखने की क्षमता नहीं थी।"
"तुम..."
"दूसरों की बदली हुई यादों को पहचान सकती थीं।"
अन्वी ने धीरे से पूछा—
"और A-14?"
इस बार...
आर्या ने जवाब दिया।
"A-14..."
"...यादें पहचान नहीं सकता।"
अन्वी ने उसकी तरफ़ देखा।
"तो क्या कर सकता है?"
आर्या की आँखें दरवाज़े पर टिक गईं।
"यादें बना सकता है।"
अचानक...
पूरा कमरा काँप उठा।
दरवाज़े पर लगी लॉकिंग सिस्टम की सारी लाइटें...
एक-एक करके हरी होने लगीं।
बीप...
बीप...
बीप...
राघव पीछे हट गए।
"बहुत देर हो चुकी है।"
दरवाज़ा खुलने लगा।
धीरे-धीरे।
अंदर...
एक गोल कमरा था।
बीच में कोई मशीन नहीं।
कोई कैप्सूल नहीं।
सिर्फ़...
एक लड़की खड़ी थी।
पीठ उनकी तरफ़।
लंबे बाल।
सफेद कपड़े।
और हाथ में...
एक पुरानी डायरी।
अन्वी ने उसे देखते ही महसूस किया...
जैसे उसके भीतर कोई भूली हुई याद जाग रही हो।
लड़की धीरे-धीरे मुड़ी।
उसका चेहरा...
अन्वी से मिलता-जुलता था।
इतना कि...
अन्वी एक कदम पीछे हट गई।
आर्या के होंठों से निकला—
"A-14..."
लड़की मुस्कुराई।
फिर उसने डायरी अन्वी की ओर बढ़ाई।
"तुम्हें..."
"ये चाहिए था ना?"
अन्वी ने डायरी को देखा।
उसका कवर...
भूरा था।
किनारों पर वही पुराने निशान...
जो उसे बचपन से जाने-पहचाने लगते थे।
उसने काँपते हाथों से डायरी ली।
पहला पन्ना खोला।
और...
उसकी आँखों के सामने दुनिया रुक गई।
पहले पन्ने पर लिखा था—
"अगर तुम ये पढ़ रही हो..."
"...तो अब तुम्हें अपनी सबसे बड़ी सच्चाई जाननी होगी।"
नीचे हस्ताक्षर थे—
मीरा।
अन्वी की आँखों से आँसू बह निकले।
"माँ..."
लेकिन अगले पन्ने पर...
एक ऐसा सच लिखा था...
जिसने उसकी साँस रोक दी।
"अन्वी मेरी बेटी है..."
"...लेकिन समर उसका पिता नहीं है।"
अन्वी ने काँपते हाथों से अगला पन्ना पलटा।
पन्ना खाली था।
फिर...
उसके सामने बैठे A-14 ने बहुत धीरे कहा—
"क्योंकि तुम्हारे पिता..."
वह कुछ पल रुकी।
फिर उसकी आँखें सीधे आर्यन पर टिक गईं।
"...आर्यन हैं।"
कमरे में...
जैसे समय रुक गया।
अन्वी ने धीरे-धीरे आर्यन की ओर देखा।
उनकी आँखों में...
आँसू थे।
लेकिन इस बार...
उन्होंने कुछ छिपाया नहीं।
उन्होंने बस इतना कहा—
"हाँ, अन्वी..."
"मैं तुम्हारा पिता हूँ।"
लेकिन...
डायरी का आख़िरी पन्ना अभी बाकी था।
अन्वी ने उसे पलटा।
उस पर सिर्फ़ एक वाक्य लिखा था—
"लेकिन आर्यन को भी नहीं पता कि वह तुम्हें किससे बचा रहा था।"
अन्वी ने सिर उठाया।
आर्यन का चेहरा...
पहली बार पूरी तरह डर से भर गया था।
और A-14...
धीरे से मुस्कुराई।
"अब..."
"सच में खेल शुरू होगा।"
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