खामोश पन्ने Chapter 18 – तीसरा खिलाड़ी | Original Hindi Mystery Novel
📖 KHAMOSH PANNE
Chapter 18 – तीसरा खिलाड़ी ❤️
"कभी-कभी कहानी में दो लोग आमने-सामने होते हैं... लेकिन असली खेल कोई तीसरा खेल रहा होता है।"
प्रयोगशाला में...
सायरन लगातार बज रहे थे।
लाल रोशनी दीवारों पर घूम रही थी।
हर स्क्रीन पर एक ही चेतावनी चमक रही थी—
SECURITY BREACH
MEMORY GRID ACTIVE
अन्वी ने आर्या का हाथ कसकर पकड़ रखा था।
उसके सामने...
एक तरफ़ आर्या।
दूसरी तरफ़ घायल आर्यन।
पीछे डॉ. राघव।
और स्क्रीन पर...
कबीर मल्होत्रा।
लेकिन...
अभी-अभी जो आवाज़ आई थी...
वह कबीर की नहीं थी।
अँधेरे से फिर वही आवाज़ आई—
"कबीर..."
"तुमने बहुत अच्छा काम किया।"
कबीर के चेहरे की मुस्कान गायब हो गई।
पहली बार...
वह असहज दिखाई दिया।
अन्वी ने पूछा—
"कौन है?"
कोई जवाब नहीं आया।
बस...
प्रयोगशाला की सबसे बड़ी स्क्रीन पर एक नया चेहरा उभरा।
चेहरा धुंधला था।
आवाज़ शांत थी।
लेकिन उसमें ऐसी ठंडक थी...
जिसने कमरे में मौजूद हर इंसान को चुप कर दिया।
डॉ. राघव ने स्क्रीन देखते ही फुसफुसाया—
"नहीं..."
आर्यन ने पूछा—
"कौन है?"
राघव ने जवाब दिया—
"वही..."
"जिससे बचाने के लिए हमने A-13 बनाया था।"
अन्वी ने उनकी तरफ़ देखा।
"कौन?"
राघव ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा—
"तीसरा खिलाड़ी।"
स्क्रीन पर धुंधला चेहरा धीरे-धीरे साफ़ होने लगा।
अन्वी की साँस रुक गई।
उसे लगा...
जैसे उसने वह चेहरा पहले कहीं देखा है।
बहुत पहले।
बहुत करीब।
लेकिन याद...
साथ नहीं दे रही थी।
कबीर ने अचानक कहा—
"आपने कहा था..."
"आप कभी वापस नहीं आएँगे।"
स्क्रीन पर मौजूद व्यक्ति हल्का-सा हँसा।
"मैं गया ही कब था?"
कमरे में सन्नाटा छा गया।
आर्या ने अचानक अपना सिर पकड़ लिया।
उसकी साँसें तेज़ होने लगीं।
"नहीं..."
"ये आवाज़..."
"मैं इसे जानती हूँ।"
अन्वी ने उसे संभाला।
"आर्या?"
आर्या ने आँखें बंद कर लीं।
और फिर...
उसके मुँह से एक नाम निकला—
"समर..."
राघव के हाथ से फ़ाइल गिर गई।
आर्यन ने अविश्वास से कहा—
"समर..."
"वो तो..."
"मर चुका था।"
कबीर ने वाक्य पूरा किया।
स्क्रीन पर मौजूद आदमी हँस पड़ा।
"लोग अक्सर यही मान लेते हैं..."
"कि जो दिखाई नहीं देता..."
"...वह मर चुका है।"
अन्वी के भीतर अचानक एक अजीब-सी बेचैनी उठी।
"समर कौन है?"
आर्यन ने उसकी तरफ़ देखा।
उनकी आँखों में डर था।
वही डर...
जो अन्वी ने पहली बार आर्या हाउस में देखा था।
"समर..."
"मीरा का छोटा भाई था।"
अन्वी चौंकी।
"माँ का भाई?"
आर्यन ने सिर हिलाया।
"और Project A-13 शुरू होने की असली वजह भी वही था।"
डॉ. राघव ने धीरे से कहा—
"समर को विश्वास था कि इंसान की यादें सिर्फ़ दिमाग़ में नहीं रहतीं..."
"वो एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं।"
"उसने Memory Grid बनाया।"
"हमने उसे रोकने की कोशिश की।"
"लेकिन..."
"मीरा ने उसका साथ छोड़ दिया।"
अन्वी ने पूछा—
"क्यों?"
राघव कुछ कह पाते...
उससे पहले स्क्रीन पर समर बोल उठा—
"क्योंकि मीरा को समझ आ गया था..."
"कि यादों को नियंत्रित करना..."
"...इंसान को नियंत्रित करने से अलग नहीं है।"
अन्वी की आँखों में आँसू आ गए।
"तो माँ..."
"मेरे खिलाफ़ नहीं थीं।"
आर्यन ने कहा—
"तुम्हारी माँ..."
"तुम्हें इस पूरे खेल से दूर रखना चाहती थी।"
समर की आवाज़ आई—
"और इसलिए उसने तुम्हें छिपा दिया।"
"लेकिन..."
समर कुछ पल रुका।
"एक बात वह भूल गई।"
अन्वी ने पूछा—
"क्या?"
स्क्रीन पर पहली बार...
समर का चेहरा पूरी तरह साफ़ हुआ।
उसकी आँखें...
बिल्कुल अन्वी जैसी थीं।
वह बोला—
"तुम सिर्फ़ A-13 नहीं हो।"
"तुम मेरी बेटी हो।"
अन्वी...
जैसे पत्थर की हो गई।
"नहीं..."
उसने सिर हिलाया।
"नहीं..."
"ये झूठ है।"
आर्यन ने तुरंत कहा—
"अन्वी, उसकी बात मत मानना!"
समर हँसा।
"आर्यन..."
"तुमने हमेशा सच छिपाया है।"
फिर...
एक स्क्रीन पर पुरानी वीडियो रिकॉर्डिंग खुली।
मीरा दिखाई दी।
उसकी गोद में...
एक नवजात बच्ची थी।
और उसके सामने...
एक आदमी खड़ा था।
चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था।
लेकिन...
उसकी आवाज़...
बिल्कुल समर जैसी थी।
मीरा रोते हुए कह रही थी—
"अगर मेरी बेटी को कभी यह सच पता चला..."
"...तो वह खुद तय करेगी कि उसे किस पर विश्वास करना है।"
वीडियो बंद हो गया।
अन्वी की आँखों से आँसू बहने लगे।
उसने आर्यन की तरफ़ देखा।
"आपने मुझसे क्या-क्या छिपाया है?"
आर्यन के पास कोई जवाब नहीं था।
तभी...
आर्या ने अन्वी का हाथ पकड़ लिया।
"अन्वी..."
"मुझे कुछ याद आ रहा है।"
"क्या?"
आर्या ने काँपते हुए कहा—
"हम दोनों..."
"...अकेली बेटियाँ नहीं थीं।"
अन्वी ने उसकी तरफ़ देखा।
"क्या मतलब?"
आर्या की आँखों में अचानक डर उतर आया।
उसने प्रयोगशाला की सबसे पीछे वाली स्क्रीन की ओर इशारा किया।
वहाँ...
Project A-13 की सूची खुली थी।
A-01...
A-02...
A-03...
A-04...
A-05...
कुल...
13 Subjects.
लेकिन...
सबसे नीचे...
एक नया नंबर चमक रहा था।
A-14
उसके सामने सिर्फ़ एक शब्द लिखा था—
ACTIVE
अन्वी की धड़कन तेज़ हो गई।
"अगर A-13 मैं हूँ..."
"तो A-14 कौन है?"
समर की आवाज़ आई—
"यही तो..."
"अगला सवाल है।"
अचानक...
पूरी प्रयोगशाला की स्क्रीन काली हो गईं।
फिर...
एक नई लाइव वीडियो दिखाई दी।
एक अंधेरा कमरा।
उस कमरे के बीच...
एक कुर्सी।
और उस कुर्सी पर...
कोई बैठा था।
चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था।
सिर्फ़ आवाज़ आई—
"अन्वी..."
"अब तुम्हें तय करना है..."
"सच चाहिए..."
"या अपनी माँ की आख़िरी इच्छा?"
स्क्रीन बंद।
सन्नाटा।
अन्वी ने धीरे से अपनी मुट्ठी बाँधी।
उसकी आँखों में अब डर कम...
और फैसला ज़्यादा था।
उसने आर्या की तरफ़ देखा।
फिर आर्यन की तरफ़।
और अंत में...
उस अँधेरे स्क्रीन की तरफ़।
"अब..."
उसने धीमी लेकिन दृढ़ आवाज़ में कहा—
"मैं किसी के बनाए हुए नियमों पर नहीं चलूँगी।"
"मैं खुद अपना सच ढूँढूँगी।"
और उसी क्षण...
प्रयोगशाला की आख़िरी स्क्रीन पर एक शब्द चमका—
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