खामोश पन्ने Chapter 14 – निर्माता | Original Hindi Mystery & Emotional Novel
क्या होगा जब कोई अजनबी यह कहे कि उसने सिर्फ़ आपकी किस्मत नहीं... बल्कि आपकी पूरी ज़िंदगी लिखी है?
खामोश पन्ने Chapter 14 – निर्माता में डॉ. राघव मेहरा पहली बार Project A-13 का असली सच सामने रखते हैं। मीरा का अधूरा वीडियो, आर्या के ज़िंदा होने का संकेत और 'The Order' की एंट्री कहानी को अब तक के सबसे बड़े मोड़ पर पहुँचा देती है।
📖 पढ़िए — खामोश पन्ने Chapter 14 : निर्माता
📖 KHAMOSH PANNE
Chapter 14 – निर्माता ❤️
"जिसने तुम्हें जन्म दिया... वह हमेशा तुम्हारा निर्माता नहीं होता। कभी-कभी निर्माता वह होता है... जिसने तुम्हारी किस्मत लिखी हो।"
तहखाने में...
सन्नाटा पहले से भी भारी हो चुका था।
सफ़ेद दाढ़ी वाला बूढ़ा आदमी...
अपनी छड़ी के सहारे धीरे-धीरे आगे बढ़ा।
उसकी हर कदम की आवाज़...
पत्थर की दीवारों से टकराकर लौट रही थी।
ठक...
ठक...
ठक...
अन्वी...
डर और गुस्से के बीच खड़ी थी।
"आपने कहा..."
"आप मेरे निर्माता हैं।"
"इसका मतलब क्या है?"
बूढ़ा आदमी मुस्कुराया।
"मतलब..."
"तुम्हारी कहानी..."
"तुम्हारे जन्म से भी पहले लिखी जा चुकी थी।"
आर्यन गुस्से से चीखा—
"बस करो, राघव!"
"अब और नहीं!"
अन्वी चौंक गई।
"राघव...?"
बूढ़े ने पहली बार अपना नाम सुना।
वह हल्का-सा हँसा।
"हाँ..."
"डॉ. राघव मेहरा।"
"Project A-13 का मुख्य वैज्ञानिक।"
विक्रम का चेहरा भी गंभीर हो गया।
"सर..."
"इतने साल बाद भी..."
"आप बिल्कुल नहीं बदले।"
राघव ने उसकी तरफ़ देखा।
"तुम बदल गए हो, विक्रम।"
"तुम्हें सिर्फ़ सच की नहीं..."
"ताकत की भूख है।"
अन्वी ने काँपते हाथों से Project A-13 की फ़ाइल उठाई।
उसका आख़िरी पन्ना...
अब तक किसी ने नहीं खोला था।
उसने धीरे से पन्ना पलटा।
अंदर...
एक परिवार की तस्वीर थी।
तस्वीर में...
मीरा...
आर्यन...
और उनकी गोद में...
एक छह महीने की बच्ची।
लेकिन...
वह बच्ची अन्वी नहीं थी।
अन्वी की साँस अटक गई।
"ये बच्ची कौन है?"
आर्यन की आँखें भर आईं।
उसने बहुत मुश्किल से कहा—
"हमारी..."
"पहली बेटी।"
कमरे में...
फिर सन्नाटा छा गया।
"उसका नाम..."
"आर्या था।"
अन्वी की आँखें फैल गईं।
"आर्या...?"
"यानी..."
"आर्या हाउस..."
आर्यन ने सिर झुका लिया।
"हाँ..."
"उस हवेली का नाम..."
"उसी के नाम पर रखा था।"
अन्वी की आवाज़ काँपने लगी।
"वो..."
"अब कहाँ है?"
राघव ने गहरी साँस ली।
फिर...
धीरे से कहा—
"मर चुकी है।"
अन्वी के पैरों तले ज़मीन खिसक गई।
आर्यन ज़ोर से चिल्लाया—
"झूठ!"
"वह मरी नहीं थी!"
राघव की आँखों में पहली बार पछतावा दिखाई दिया।
"उस रात..."
"गोदाम में आग लगी।"
"हम सबको लगा..."
"आर्या नहीं बची।"
"लेकिन..."
"उसकी लाश कभी नहीं मिली।"
अन्वी के मन में...
सैकड़ों सवाल उठने लगे।
उसी समय...
तहखाने की दीवार पर लगा पुराना प्रोजेक्टर...
अपने-आप चालू हो गया।
कोई उसे छू भी नहीं रहा था।
स्क्रीन पर...
एक नई रिकॉर्डिंग चलने लगी।
वीडियो में...
मीरा दिखाई दी।
उसकी आँखें रोने से लाल थीं।
उसने कैमरे की तरफ़ देखते हुए कहा—
"अगर कोई यह वीडियो देख रहा है..."
"तो समझ लेना..."
"आर्या ज़िंदा है।"
अन्वी का दिल ज़ोर से धड़कने लगा।
मीरा आगे बोली—
"लेकिन..."
"वह उस नाम से नहीं जी रही।"
वीडियो अचानक रुक गया।
पूरा कमरा...
एक बार फिर अँधेरे में डूब गया।
अन्वी ने घबराकर पूछा—
"आगे क्या था?"
राघव ने धीमी आवाज़ में कहा—
"आगे का हिस्सा..."
"मेरे पास है।"
विक्रम तुरंत बोला—
"और मुझे चाहिए।"
अचानक...
तहखाने के बाहर से...
सायरन की आवाज़ गूँजने लगी।
वूँ... वूँ... वूँ...
सब एक-दूसरे को देखने लगे।
आर्यन फुसफुसाया—
"वे लोग..."
"हमें ढूँढते हुए यहाँ तक पहुँच गए।"
अन्वी ने पूछा—
"कौन लोग?"
राघव का चेहरा पीला पड़ गया।
उसने सिर्फ़ एक नाम लिया—
"द ऑर्डर..."
उसी पल...
तहखाने का लोहे का दरवाज़ा...
एक ज़ोरदार धमाके से टूट गया।
धड़ाम...!!!
धुएँ के बीच...
काले कपड़ों में कई नकाबपोश लोग अंदर घुस आए।
सबके हाथों में आधुनिक हथियार थे।
उनके नेता ने...
सीधे अन्वी की तरफ़ इशारा किया।
और कहा—
"Subject A-13..."
"...अब हमारे साथ चलेगी।"
अन्वी पीछे हट गई।
आर्यन उसके सामने खड़ा हो गया।
विक्रम ने भी पहली बार...
अपनी बंदूक उन नकाबपोशों की तरफ़ तान दी।
तहखाने में...
अब सच नहीं...
जंग शुरू होने वाली थी।
Chapter 14 Ends... ❤️
To Be Continued...
🔥 Next Chapter: Chapter 15 – द ऑर्डर
आपने अभी खामोश पन्ने Chapter 14 – निर्माता पढ़ा।
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क्या डॉ. राघव सच बोल रहे हैं, या उनके पीछे भी कोई और बड़ा रहस्य छिपा है?
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— Written by DilSe Diaries by Pooja.K
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