खामोश पन्ने Chapter 13 – जन्म का षड्यंत्र | Original Hindi Mystery & Emotional Novel

क्या होगा जब आपको पता चले कि आपका जन्म कोई संयोग नहीं... बल्कि वर्षों पहले रची गई एक साज़िश का हिस्सा था?

खामोश पन्ने Chapter 13 – जन्म का षड्यंत्र में अन्वी पहली बार Project A-13 का सच जानती है। मीरा, आर्यन और विक्रम के अतीत के साथ एक नया किरदार सामने आता है, जो खुद को उसका निर्माता कहता है।

📖 पढ़िए — खामोश पन्ने Chapter 13 : जन्म का षड्यंत्र

📖 KHAMOSH PANNE
Chapter 13 – जन्म का षड्यंत्र ❤️

"कुछ बच्चों का जन्म... किस्मत से नहीं होता। उन्हें किसी मकसद के लिए दुनिया में लाया जाता है।"

पूरा तहखाना...
अब भी काँप रहा था।
छत से मिट्टी गिर रही थी।
दीवारों की दरारें...
हर पल और चौड़ी होती जा रही थीं।

लेकिन...
अन्वी की नज़र...
अब भी उसी जन्म प्रमाणपत्र पर टिकी थी।

Father : Unknown
ये दो शब्द...
उसके अंदर सब कुछ तोड़ चुके थे।

उसने काँपती आवाज़ में पूछा—
"आर्यन..."
"अगर आप मेरे पिता नहीं हैं..."
"तो फिर..."
"मुझे अपना नाम क्यों दिया?"
आर्यन की आँखें भर आईं।

उसने पहली बार...
अपने घुटनों पर बैठकर कहा—
"क्योंकि..."
"जिस दिन तुम पैदा हुई थीं..."
"उसी दिन मैंने तुम्हें अपनी बेटी मान लिया था।"

अन्वी की आँखों से आँसू बह निकले।
"लेकिन..."
"मेरे असली माता-पिता कौन हैं?"
आर्यन ने जवाब देने की कोशिश की।

लेकिन...
विक्रम ने ज़ोर से ताली बजाई।
ठक...!
"वाह..."
"आख़िर..."
"सही सवाल पूछा।"

उसने धीरे-धीरे अपनी जेब से...
एक पुरानी फ़ाइल निकाली।

उस पर बड़े अक्षरों में लिखा था—
PROJECT A-13
अन्वी चौंक गई।

"ये क्या है?"
विक्रम मुस्कुराया।
"तुम..."
"यही हो।"
"क्या मतलब?"
"तुम..."
"कोई साधारण बच्ची नहीं थीं।"

पूरे कमरे में...
सन्नाटा छा गया।
विक्रम ने फ़ाइल खोली।

पहले पन्ने पर...
दर्जनों नवजात बच्चों की तस्वीरें थीं।
हर तस्वीर के नीचे...
एक नंबर लिखा था।
A-01
A-02
A-03
...
A-12
और...
सबसे आख़िर में...
एक तस्वीर।

गोद में रोती हुई नवजात बच्ची।
उसके नीचे लिखा था—
A-13
Status : Alive

अन्वी का दिल ज़ोर से धड़कने लगा।
वह तस्वीर...
उसी की थी।

"नहीं..."
उसके मुँह से बस इतना ही निकला।
आर्यन ने गुस्से में फ़ाइल छीन ली।

"चुप हो जा विक्रम!"
लेकिन...
अब बहुत देर हो चुकी थी।

अन्वी सब देख चुकी थी।
"ये Project A-13 क्या है?"
विक्रम ने गहरी साँस ली।

"अट्ठाईस साल पहले..."
"देश के कुछ सबसे अमीर और ताकतवर लोगों ने..."
"एक गुप्त प्रयोग शुरू किया था।"
"ऐसा प्रयोग..."
"जिसमें..."
"कुछ बच्चों को जन्म से ही चुना गया।"
"क्यों?"
"क्योंकि..."
"उन्हें विश्वास था..."
"कि इंसान की यादें..."
"जन्म से पहले भी बचाई जा सकती हैं।"

अन्वी के हाथ सुन्न पड़ गए।
आर्यन चीखा—
"बस करो!"
लेकिन...
विक्रम नहीं रुका।

"मीरा..."
"इस प्रोजेक्ट की वैज्ञानिक थी।"
"और..."
"आर्यन..."
"उसे बचाने आया था।"

"फिर?"
"मीरा ने..."
"तुम्हें लेकर भागने की कोशिश की।"

"लेकिन..."
"उस रात..."
"गोदाम में आग लग गई।"

अन्वी की साँसें रुक गईं।
वही आग...
जिसका ज़िक्र डायरी में कई बार आया था।
"उस आग में..."
"सारे रिकॉर्ड जल गए।"

"सिर्फ़..."
"एक बच्ची बची।"
विक्रम ने...
अन्वी की आँखों में देखते हुए कहा—
"वो बच्ची... तुम थीं।"

पूरा तहखाना...
एक बार फिर ज़ोर से काँपा।
अचानक...
दीवार पर लगी एक पुरानी घड़ी...
अपने-आप चलने लगी।

टिक...
टिक...
टिक...
आर्यन का चेहरा डर से भर गया।

"नहीं..."
"ये नहीं हो सकता..."
अन्वी ने पूछा—
"क्या हुआ?"

आर्यन काँपती आवाज़ में बोला—
"अगर..."
"घड़ी फिर चल पड़ी है..."
"तो इसका मतलब..."
"वो वापस आ चुका है।"

"कौन?"
किसी ने जवाब नहीं दिया।

उसी समय...
तहखाने का सबसे पुराना दरवाज़ा...
धीरे-धीरे खुलने लगा।
च्र्रर्र...
अंदर...
घना अँधेरा था।
फिर...
एक छड़ी की आवाज़ आई।
ठक...
ठक...
ठक...
कदम...
धीरे-धीरे बाहर आने लगे।
एक सफ़ेद दाढ़ी वाला बूढ़ा आदमी...
अँधेरे से बाहर निकला।
उसकी आँखें...
असामान्य रूप से नीली थीं।
वह सीधे...
अन्वी के सामने आकर रुका।

उसने मुस्कुराकर कहा—
"स्वागत है..."
"Subject A-13."
अन्वी का पूरा शरीर काँप उठा।

"आप..."
"कौन हैं?"
बूढ़ा आदमी मुस्कुराया।
धीरे से बोला—
"मैं..."
"...तुम्हारा निर्माता हूँ।"
आर्यन घुटनों के बल बैठ गया।

विक्रम के चेहरे से पहली बार मुस्कान ग़ायब हो गई।
और...
अन्वी को पहली बार महसूस हुआ...
कि शायद...
उसकी कहानी...
अभी शुरू ही हुई है।

Chapter 13 Ends... ❤️
To Be Continued...

🔥 Next Chapter: Chapter 14 – निर्माता

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— Written by DilSe Diaries by Pooja.K



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