खामोश पन्ने Chapter 10 – असली पिता | Original Hindi Mystery & Emotional Novel


क्या होगा जब आपको पहली बार अपने असली पिता का सुराग मिले... लेकिन उसी पल आपकी मौत का रास्ता भी खुल जाए?

खामोश पन्ने Chapter 10 – असली पिता में अन्वी के हाथ लगती है आर्या हाउस की रहस्यमयी चाबी। डायरी उसे चेतावनी देती है कि जिस इंसान पर वह भरोसा कर रही है, वही उसे सबसे बड़े धोखे की ओर ले जा रहा है।

📖 पढ़िए — खामोश पन्ने Chapter 10 : असली पिता

📖 KHAMOSH PANNE
Chapter 10 – असली पिता ❤️

"कुछ सच... ज़िंदगी बदल देते हैं। लेकिन कुछ सच... पूरी पहचान छीन लेते हैं।"

लालटेन की रोशनी...
धीरे-धीरे बुझने लगी।
कमरे में सन्नाटा था।

अन्वी की आँखें...
अब भी उस पुरानी तस्वीर पर टिकी थीं।
तस्वीर के पीछे लिखा था—
"मेरी अन्वी के लिए...
अगर मैं लौटकर न आऊँ...
तो कभी ये मत सोचना कि मैंने तुम्हें छोड़ दिया।"

उसके नीचे...
एक नाम था।
— आर्यन।

अन्वी ने काँपते हाथों से तस्वीर को सीने से लगा लिया।
उसकी आँखों से आँसू लगातार बह रहे थे।

"तो..."
"आर्यन..."
"मेरे असली पापा हैं...?"
विक्रम मुस्कुराया।
"हाँ..."
"लेकिन तुम उनसे कभी नहीं मिल पाओगी।"

"क्यों?"

अन्वी चीख पड़ी।
"वो कहाँ हैं?"

विक्रम ने जवाब देने से पहले...
जेब से एक पुरानी चाबी निकाली।
उस पर जंग लगी थी।

लेकिन...
उसके ऊपर एक शब्द साफ़ लिखा था—
"आर्या हाउस"
बुज़ुर्ग महिला का चेहरा सफेद पड़ गया।

उन्होंने घबराकर कहा—
"नहीं..."
"वो चाबी उसे मत देना..."
"क्यों?"
अन्वी ने पूछा।

महिला की आँखों में डर साफ़ दिखाई दे रहा था।
"क्योंकि..."
"उस घर में..."
"कोई रहता नहीं..."
"फिर भी..."
"हर रात वहाँ किसी के चलने की आवाज़ आती है।"

विक्रम ने चाबी अन्वी की हथेली पर रख दी।
"अगर अपने पिता से मिलना है..."
"तो आज रात..."
"बारह बजे..."
"आर्या हाउस पहुँच जाना।"

"और अगर मैं नहीं गई तो?"

"तो..."
"तुम्हें कभी पता नहीं चलेगा..."
"कि मीरा ने अपनी आख़िरी साँस लेने से पहले..."
"तुम्हारे कान में क्या कहा था।"

अन्वी का दिल ज़ोर से धड़क उठा।
"मीरा..."
"मेरे पास थी...?"
विक्रम ने सिर हिलाया।

"तुम सिर्फ़ छह महीने की थीं।"
"उसने तुम्हें अपनी गोद में लेकर..."
"एक वादा किया था।"

"कौन-सा वादा?"

विक्रम ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा—
"कि चाहे उसे अपनी जान क्यों न देनी पड़े..."
"वो तुम्हें..."
"उन लोगों से बचाएगी..."

"कौन लोग?"

विक्रम चुप हो गया।
उसने जवाब नहीं दिया।

उसी समय...
अन्वी के बैग में रखी पुरानी डायरी...
अपने-आप खुल गई।

उसके पन्ने तेज़ हवा में पलटने लगे।
फड़...
फड़...
फड़...
एक पन्ने पर आकर वे रुक गए।

उस पन्ने पर पहले कुछ भी नहीं लिखा था।
लेकिन...
धीरे-धीरे...
स्याही अपने-आप उभरने लगी।

अन्वी ने काँपते हुए पढ़ा—
"जिस आदमी पर तुम सबसे ज़्यादा भरोसा कर रही हो..."
"...वही तुम्हें आर्या हाउस तक ले जाएगा।"

"लेकिन..."
"वो तुम्हें वापस नहीं आने देगा।"
अन्वी ने तुरंत विक्रम की तरफ़ देखा।

क्या...
डायरी उसी की बात कर रही थी?
विक्रम मुस्कुरा रहा था।
जैसे...
उसे पहले से पता हो...
कि डायरी में क्या लिखा है।

"चलो..."
उसने कहा।
"समय बहुत कम है।"

बाहर...
बारिश फिर शुरू हो चुकी थी।
आसमान में बिजली चमकी।
उस एक पल की रोशनी में...
अन्वी ने विक्रम की गर्दन पर एक अजीब-सा निशान देखा।

वही निशान...
जो बचपन की एक धुंधली तस्वीर में...
उसके असली पिता आर्यन की गर्दन पर भी था।

अन्वी का दिमाग़ सुन्न पड़ गया।
अगर...
विक्रम उसके पिता नहीं था...
तो...
उसके पास वही निशान कैसे था?
वह कुछ पूछ पाती...
उससे पहले...
बुज़ुर्ग महिला ने दौड़कर उसका हाथ पकड़ लिया।

उन्होंने उसकी मुट्ठी में चुपके से एक छोटी-सी चाँदी की चाबी रख दी।
बहुत धीरे से फुसफुसाईं—
"आर्या हाउस का मुख्य दरवाज़ा मत खोलना..."
"...तहखाने वाला रास्ता चुनना।"
"वरना..."
"...तुम भी मीरा की तरह हमेशा के लिए गायब हो जाओगी।"

अन्वी की साँसें तेज़ हो गईं।
एक हाथ में जंग लगी बड़ी चाबी...
दूसरे हाथ में छोटी चाँदी की चाबी...
और सामने...
बारिश में खड़ा विक्रम।

आज की रात...
उसकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा फ़ैसला बनने वाली थी।
जैसे ही वह शांतिवन आश्रम के बाहर पहुँची...
उसकी नज़र सड़क के दूसरी तरफ़ खड़ी...
एक पुरानी काली कार पर पड़ी।

कार की पिछली सीट पर...
कोई बैठा था।

बिजली फिर चमकी।
एक पल के लिए चेहरा साफ़ दिखाई दिया।
अन्वी का दिल धड़कना भूल गया।

वह चेहरा...
ठीक वैसा ही था...
जैसा तस्वीर में उसके असली पिता आर्यन का था।

लेकिन...
अगले ही पल...
कार तेज़ी से अँधेरे में ग़ायब हो गई।
अन्वी के हाथ से तस्वीर गिर गई।

उसने फुसफुसाकर कहा—
"अगर वो मेरे पापा थे..."
"...तो विक्रम कौन है?"

Chapter 10 Ends... ❤️
To Be Continued...

अगला अध्याय: Chapter 11 – आर्या हाउस का तहखाना 🔥

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क्या विक्रम दुश्मन है... या सच तक पहुँचने का आख़िरी रास्ता?

📖 अगला अध्याय हर शाम 7:00 PM (IST) पर Blogger पर प्रकाशित होगा।

— Written by DilSe Diaries by Pooja.K

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